फुर्सतनामा


रिपोर्टर की डायरी
फ़रवरी 25, 2009, 2:57 अपराह्न
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कहां हो भाई, रिपोर्ट कब तक दोगी। यह आवाज थी डेस्क से।

वो चाहता था कि बीस मिनट पहले बताई स्टोरी दस मिनट बाद फाइल हो जाती। स्टोरी तो फाइल कर ही देती पर ये इन्ट्रो की लाइने ही नही बैठ रहीं। बुरा हो निशा का जो रात को नहीं करते भी तीन पैग ज्यादा कर गई। अभी तक सिर दर्द कर रहा है। चलो अभी तो जैसा भी है लिख मारो…..

रात जवान थी और डीजे की धुन पर होई थिरक रहा था। लेकिन ऐसे में कोने में अकेली खड़ी एक लड़की को एक लड़का कहता है मे आई बॉट यू ए ड्रिंक, लड़की कुछ कहती इससे पहले ही उसने का हाथ थामा और उसे खींचने लगा। लड़की चिल्लाने सी लगी लेकिन डीजे की तेज आवाज में कोई उसकी ओर ध्यान नहीं दे रहा था। तभी अचानक एक हाथ उस लड़के को रोकता है। और उठा कर क्लब से बाहर फेंक देता है। ये था क्लब का बाउंसर। जी हां, ये बाउंसर्स ही आजकल क्लब को अकेली लड़कियों के लिए सेफ जोन बना रहे हैं। सिटीटाइम्स ने शहर के कुछ क्लब्स में घूम कर ऐसे ही कुछ क्लब्स का जायजा लिया जहां बाउंसर्स हायर किए गए हैं। पता चला की यहां लड़कियां ज्यादा सेफ महसूस कर रही हैं। प्रस्तुत है रोजी सिंह की एक रिपोर्ट—

वाह क्या स्टोरी लिखी है, मजा आ गया, मैं तो कहता हूं तुम्हारा कोई मुकाबला ही नहीं है। ये कहना डेस्क हैड अनिरुद्ध का। और इतना कहते कहते वह रोजी के डीप नेक टॉप से झांक रहे उसके क्लीवेज पर नजर गढ़ाने से बाज नहीं आ रहा था। उसकी नजर का रुख देख रोजी अपनी सीट से खड़ी होते हुए बोली। बस करो इतना भी नहीं उड़ो। स्टोरी में कोई प्रॉब्लम हो तो फोन कर देना मेरा सिर दर्द कर रहा है मैं जा रही हूं। इतना कह कर वह वहां से निकल पड़ी। तभी उसके फोन पर मैसेज आया, व्हेयर आर यू बेब्स। उसने जवाब दिया., पांच मिनट में सरस पहुंचो कुछ दिल नहीं लग रहा।