फुर्सतनामा


hi
मई 9, 2008, 2:53 पूर्वाह्न
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once again i am back

from now onwords i will try my best to update this , fursatname ke liye fursat bhi to honi chahiye…. ummid hai milegi…. nahi milegi to nikal lenge.

 समय परिवर्तनशील है, और स्थितियां बदलती रहती हैं,जो आज शाह होते हैं वे कल सड़क पर होते हैं और जो कल सड़क पर थे वे आज शाह हो सकते हैं। पर सड़क से उठकर शाह बनने का यह सफर अक्सर बहुत से लोगों की सदाशयता नतीजा होता है लेकिन यह भी सच है कि कुछ पहचान पा चुके लोग, अपनी पहचान में योगदान देने वालों को श्रेय नहीं देना चाहते।क्योंकि कहीं न कहीं इससे उनकी सेल्फमेड इमेज पर असर पड़ता है। उनका छद्म अहंकार खंडित होता है। शायद यही इन्सानी प्रवृत्ति है कि वह अच्छाई के प्रतिकार में अच्छाई नहीं करता है। पर फिर भी मेरा व्यक्तिगत अनुभव कहता है कि समय बदलता है , यह कथन हमेशा सत्य है,इसलिए स्थितियां हमेशा एक सी नहीं रहती। एक छोटी कहानी है, किसी के सामने संकट था कि वह एक ऐसा कथन ढुंढ़ कर लाए जो अति सुख और अति दुःख दोनों ही स्थितियों में सम्यक अहसास करवाए। अंततः बहुत कठिनाईयों से उसने जो सूत्र ढूंढा वह है-

लीजिए, यह भी गुजर जाएगा….।
वाकई यह बेमिसाल कथन है…..


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